कैसी धूल झोंक रहे हैं आखों में....कानून मखौल है !

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Mock-order by Supreme Court: One Medical Board to validate other, but No bail.

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बापू को जाँच के लिए एम्स दिल्ली लाया गया कि वाकई बीमारी गंभीर है या नहीं. अर्थात एक मेडिकल बोर्ड जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पहले जोधपुर में बनाया गया, उसी के द्वारा की गयी जाँच के परिणामों की अब दूसरे मेडिकल बोर्ड यानि एम्स द्वारा दोबारा जाँच करवा कर पुष्टि करवाई गयी. कुछ मिलाकर जमानत नहीं देनी है तो ऐसा स्वांग क्यों? तो ऐसे में नुक्कड़ पर बैठे बापू के भक्तों का मंडल घुट बैठा एक वार्तालाप में....

“एक के बाद दूसरा मेडिकल बोर्ड गठित कर जोधपुर से लेकर एम्स तक स्वास्थ्य जाँच की कवायद तो खूब चली लेकिन बीमारी, जमानत और इलाज के लिए काफी नहीं ! कैसी धूल झोंक रहे हैं आखों में....कानून मखौल है.”

हाँ भैय्या, कानून सबके लिए बराबर है, विनायक सेन, लालू, जयललिता, तेजपाल और संजय दत्त के लिए...!

“और इससे पहले तो ‘बीमारी बस एक नाटक है’ बनाकर खूब प्रचारित किया गया...भोजन, दवाइयां और दिसंबर के जाड़े में बिस्तर समेत सामान्य सी सुविधाओं के लिए ‘कानून सबके लिए बराबर’ की दुहाई देकर नाकारा भी गया... कोर्ट में अभियोजन पक्ष वाले हरामखोर बोलते थे कि भोजन दो तो एक ही टाइम दो, अस्पताल में ले जाने की जरूरत नहीं है, डाक्टर जेल में ही आकर चेक कर लेगा ”

“और तो और भाई, जिस एम्स की रिपोर्ट पर सबको बड़ी उम्मीद थी वह भी सुप्रीम में कोई राहत नहीं दिलवा पायी, कभी तो डाकटर जाँच के बाद मीडिया के सामने आकर बोलते है कि रोग गंभीर है और जज रिपोर्ट पढ़ कर कहते है की इलाज़ की कोई जरुरत नहीं, अब किसको सच्चा माने !”

“हाँ भैय्या, कानून सबके लिए बराबर है, विनायक सेन, लालू, जयललिता, तेजपाल और संजय दत्त के लिए...साले सब के सब मजे मार रहे हैं !”

“देखो तो सही कैसे साजिश की गुथ्थियाँ बुनी गयीं इसमें...एक झूठी घटना को एक फर्जी एनजीओ के द्वारा रिपोर्ट दर्ज करवा कर बलात्कार समेत कड़ी से कड़ी धाराओं को एक तरफ़ा जाँच कर ठूसे जाना.....”

“इस कदर बाबा को सिलसिलेवार अपराधी साबित करने पर तुली हुई दुर्भावना से ग्रसित यह व्यवस्था जहां कोर्ट की हर सुनवाई के दिन मायूसी ही हाथ लगे तो ऐसी निकृष्ट, असंवेदनशील और दो-मुंही व्यवस्था के आगे लाचारी भरी उम्मींद करें तो भी आखिर कब तक ? ”

“लगभग सात साल से ज्यादा हो गये मालेगांव ब्लास्ट के केस को, कई निर्दोष धर्महितैषी देशभक्तों को जेल में सडाकर राजनैतिक स्वार्थ साधा गया, अब तो बीजेपी वालों को भी टाइम नहीं है साध्वी प्रज्ञा जी के केस के लिए कुछ सुनने का...”

“आखिर करें तो क्या करें ?”

Nishant Sharma
Writer-Activist, Crusader for Media Regulation, Anti-Corruption.
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