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कश्मीर की समस्याओं को लेकर एक बार फिर राजनितिक माहौल गरमाया हुआ है. जहाँ पिछले वर्ष बीजेपी सरकार की ओर से कश्मीर की समस्याओ को सुलझाने हेतु हर राज्य के प्रतिनिधियों की सभा बुलाई गयी थी तथा कश्मीर के अलगाववादी व हुर्रियत नेताओं से बातचीत करके मामला सुलझाने का अथक प्रयास किया गया. परन्तु अलगाववादी व हुर्रियत नेता बातचीत तो दूर मिलने तक को तैयार नहीं हुए.

बिल्कुल उसी तर्ज पर इस बार विरोधी पार्टियों द्वारा कश्मीर की समस्याओं को सुलह करने की योजना बनायीं जा रही है. विरोधी पार्टियों का जम्मू कश्मीर की दिन-ब-दिन बदतर होती हालात पर गंभीर व चिंतित होना माना जा रहा है. साथ ही कश्मीर की समस्याओं का समाधान न निकलने का ठीकरा मोदी सरकार पर फोड़ा जा रहा है. विरोधियो का ऐसा भी मानना है कि बीजेपी सरकार के केंद्र में आने से पहले UPA सरकार द्वारा इस प्रकार के प्रयास किये गये परन्तु बीजेपी सरकार द्वारा इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किये गये है. विरोधी पार्टियों का कहना है कि कश्मीर एक राजनितिक समस्या है और सभी पार्टियां एक साथ मिलकर NDA सरकार पर कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत के लिए दबाव बनाना चाहिए .

इसी सिलसिले में CPI-M के जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी का कहना है कि गैर-सरकारी तरीके से वार्तालाप किया जाना चाहिए ताकि पुरजोर समर्थन के साथ कश्मीर की समस्या का समाधान किया जा सके. CPI के नेता डी. राजा ने जदयू नेता शरद यादव व नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला से मुलाकात की है. वही जदयू नेता शरद यादव कश्मीर मुद्दे पर कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे भूतपूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से भी मिले.

 J&K के भूतपूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला ने सभी संगठनो को एक साथ मिलकर बातचीत के लिए आमंत्रित किया है साथ ही इसी सिलसिले में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात कर चुके है. इसी सिलसिले में बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा और शरद यादव कश्मीर मुद्दे पर सभी संगठनों को एक साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर वार्तालाप करने की योजना पर बातचीत की.

विरोधी पार्टियों की कश्मीर में होनी वाली सभा संभवत: संसद के मानसून सत्र से पहले जून के महीने में होगी. इस सभा में बुद्दिजीवियो, सामाजिक संगठनो व राजनितिक पार्टियों को भी आवाज़ उठाने के लिए बुलाया जायेगा.

विरोधी पार्टियों द्वारा कश्मीर कॉन्क्लेव तब की जा रही है जब बीजेपी सरकार ने कश्मीर के अलगाववादी व हुर्रियत नेताओं के देश विरोधी रवैये से कश्मीर मुद्दे पर बातचीत से साफ-साफ इनकार कर दिया तथा इसे सख्त कार्यवाही से निपटने का निर्णय ले चुकी है. इसमें कश्मीर के अलगाववादी व हुर्रियत नेताओं को आमंत्रित किया जायेगा या नहीं इस पर भी परिस्तिथियों को देखते हुए विचार किया जाना है.

गौरतलब है कि लम्बे समय से कश्मीर की घाटी में पत्थरबाजों द्वारा विरोध प्रदर्शन की हिंसक घटनाओं ने वीभत्स रूप दिखाया है. हिजबुल मुजाहिद्दीन के अलगाववादी बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से कश्मीर में हिंसा का उफान रहा है तथा इसमें देश विरोधी प्रदर्शनों में 90 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वही बीते 9 अप्रैल 2017 को श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान लगभग 200 से ज्यादा हिंसात्मक घटनाएँ हुयी जिसने 9 लोगों की मौत हो चुकी है.

 

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