1782
Total
Engagement

उरी में पाकिस्तानी के भेजे गए जैश-ए-मोहम्मद के आंतकियों द्वारा कायराना हमले में भारतीय सेना के जवानों की हत्या के बाद पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए पाकिस्तान के साथ 56 साल पुरानी सिन्धु जल समझौता समेत तमाम साझे-समझौते रद्द करने के लिए लगातार मांग उठ रही है.

ऐसा ही एक मसला सलामाबाद का है. उत्तरी कश्मीर के उरी में सेना के बेस पर हमला करने वाले आतंकवादियों के इसी सलामाबाद-उरी के रास्ते से सीमा पार कर घुसने के संभावना जताई जा रही है. सलामाबाद, एल. ओ. सी पर बसा एक गाँव जो पाक अधिकृत कश्मीर और जम्मू और कश्मीर को जोड़ता है. यह ट्रेड रूट के दोनों देशो के बीच में वस्तुओं के आयात और निर्यात के लिए एक व्यापारिक मंडी है जहां पाकिस्तान से लाये गए चावल, शहद, फल-सब्जियां, पेशावरी चप्पल, नमाजी कालीनों, दीवार पर सजावटी तस्वीरों को भारत में बेचा जाता है और भारत की तरफ से अखरोट, केसर, सेब, मसाले और मशहूर कश्मीरी कारपेट्स को पाकिस्तान जाने वाले ट्रकों में लाद दिया जाता है. पाक अधिकृत कश्मीर में चिकोटी इस रास्ते का आखिर पड़ाव होता है जहां पाकिस्तान से आने वाले ट्रक जाँच के बाद सलामाबाद के एक्सचेंज पॉइंट के लिए आगे बढ़ते हैं. यही नहीं, चिकोटी और सलामाबाद के व्यापारियों ने मिलकर एक सलामाबाद-चिकोटी व्यापारिक संघ भी बनायीं  हुआ है. 2013 के अंत में सलामाबाद में केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से एक व्यापार सुविधा केंद्र भी बनाया गया है जिसका उद्देश्य व्यवसायिक गतिविधियों को सुगम बनाना है. इसके अनुसार पिछले 3 सालो में 3000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का व्यापार सीमापार से हुआ है. इस व्यापारिक आदान प्रदान में पाकिस्तान एक बड़ा हिस्सा रखते हुए सालाना 1000 करोड़ रुपये से ज्यादा की जरुरत की चीजें भारत से खरीदता है.

 

फोटो : निसार अहमद 

लेकिन इस दौरान कुछ अवैध वस्तुओ और हथियार भी पकडे गए. जब भी इस तरह के कार्यवाही की जाती है और ट्रकों में आने वाले वस्तुओं की गहन जाँच की जाती है तो यूनियन के व्यापारी जाँच का विरोध करते रहे हैं और कार्यवाही में पकडे गए संदिग्धों को छुड़ाने का पूरा प्रयास भी किया है.

ऐसा ही एक मामला जनवरी 2014 का है जब पाक अधिकृत कश्मीर से आया हुए एक ट्रक में 114 किलोग्राम ब्राउन शुगर पकड़ी गयी थी और ट्रक चालक को गिरफ्तार किया गया तो पाकिस्तान ने कुछ भारतीयों ट्रको और उनके चालको को रोक लिया और यहाँ आये हुए पाक ट्रको को भी वापस लेने से मना कर दिया तो श्रीनगर के व्यापारियो ने अपने होने वाले नुकसान को रोकने के लिए मामले को जल्दी निपटने का दवाब जम्मू कश्मीर सरकार पर दबाव बनाया और कहा की कश्मीर की अर्थव्यवस्था को इससे भारी नुकसान हो रहा है. मतलब कि तब चंद व्यापारियों के लिए देश की सुरक्षा से ज्यादा अपना व्यापार ज्यादा जरुरी हुआ और मजबूर इस मामले में ढिलाई बरतनी पड़ी. सलामाबाद का यह व्यापारी संघ अपने व्यापार का हवाला देकर इस प्रकार की गैरकानूनी आवाजाही को बढ़ावा देते हैं ताकि आतंकवादियों को परोक्षरूप से सहयोग मिल जाता है. इसीलिए उरी हमले को देखते हुए यहाँ के व्यापारियों के द्वारा घुसपैठी आतंकियों को सीमापार कराने और पनाह देने की गुंजाइश को भी जाँच से दरकिनार नहीं किया जा सकता.   

गौरतलब है कि आज सलामाबाद घुसपैठ के लिए एक आसान भेद्य पॉइंट में परिवर्तित हुआ है, इसके पीछे के कारण पिछले कुछ समय में सीमा पार हथियार, नकली मुद्रा और ड्रग्स को सामान में छुपाकर की जाने वाली सप्लाई का पकडे जाना भी है जो कई बार तो पकड़ में आ जाती है और कभी -कभी बच भी जाती है.

ऐसा ही एक दूसरा पहलू कि सलामाबाद के ट्रेडरूट के जरिये हवाला का पैसा कश्मीर में आतंकवादी, अलगाववादी और वहाबी विचारधारा की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भेजा जाना है. इसके लिए यहाँ से भेजे जाने वाले माल के बदले में ज्यादा पैसों का भुगतान करने जैसे तरीके अख्त्यार करने की खबरें भी उजागर हुई हैं.

ऐसे में भारत और पाकिस्तान के बीच में तनाव भरे हालातों में क्या सलामाबाद जैसे ट्रेडरूट की जिसकी वजह से देश की सुरक्षा व्यवस्था को खतरा साबित होता रहा है, जो घुसपैठ के लिए एक खुली खिड़की तरह है, को बंद किये जाने की समीक्षा नहीं होनी चाहिए?   

Our Articles