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जेएनयू के ज्यादा पढ़े-लिखे लोगों अब दोबारा मत पूछना बलूचिस्तान का मसला क्या है?

बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किये नरसंहार और दमन के उन तमाम ऐतिहासिक दस्तावेजों, मानवीय उत्पीडन के फुटेज और बलूच आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे एक्टिविस्ट्स के बयानों को समेटे एक डॉक्युमेंट्री

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  • October 14,2016
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एक बार जाने-माने लेखक और कमेंटेटर तारक फतेह से जेनयू में सेमिनार के दौरान साऊथ एशियन स्टडीज का एक पी.एच.डी स्कॉलर खड़ा हो कर पूछ लेता है कि बलूचिस्तान का मसला क्या है? बड़ी गजब बात है, कश्मीर में ‘गो बेक इण्डिया’ के चस्पा हुए पोस्टरों से लेकर दुनिया भर की खोज-खबर रखने वाले इन ज्ञानी चरमपंथियों का शोध भी थोथा ही साबित.

  • ‘टाइम्स नाऊ’ ने बलूचिस्तान में पाकिस्तान द्वारा किये नरसंहार और दमन के उन तमाम ऐतिहासिक दस्तावेजों, मानवीय उत्पीडन के फुटेज और बलूच आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे एक्टिविस्ट्स के बयानों को एक डॉक्युमेंट्री में ढाला है. देखिये ये खास वीडियो उनके लिए जो बलूचिस्तान के अन्दर पाकिस्तानी सेना की दरिंदगी से वाकिफ नहीं हैं.
  • 1948 में पाकिस्तान द्वारा सियासी कब्ज़ा किये जाने के बाद बलूचिस्तान अपनी आज़ादी के संघर्षरत है. पाकिस्तानी सेना और इंटेलिजेंस एजेंसियों द्वारा बलूच निवासियों पर अत्याचारों की इन्तेहा हो गयी है. बलूचिस्तान जो पाकिस्तान के सरजमीं का लगभग  चालीस प्रतिशत हिस्सा है, बेहद सामरिक और आर्थिक महत्ता रखता है. लेकिन आज़ादी के लिए कोई बलोच जो भी आज़ादी के लिए खुलकर आवाज उठाता है पाकिस्तान द्वारा उसे या तो बंदी बना कर ग़ायब कर दिया जाता हैं या मार दिया जाता हैं. 2005 से अब तक 3400 से ज्यादा लोग लापता हो चुके है.
  • बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के दमन का वही भीषण ट्रेंड जारी है, जो सत्तर के दशक में तबके ईस्ट पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में बड़ी तादात में लेखकों, प्रोफेसर्स, डॉक्टर्स, कवियों, वकीलों और हुकूमत के विरुद्ध लड़ने वाले स्टूडेंट्स को एक जगह इकठ्ठा कर अमानवीय तरीके से कत्ले आम कर दिया गया. दस महीनों में लगभग ३० लाख लोगों का कत्लेआम हुआ.
  • पाकिस्तान द्वारा अमानवीय यातनाओं की पराकाष्ठा पार करते हुए बलूचिस्तान के लिए उठ खड़े होने वाले हर शख्स को चुप करा दिया गया है. मार्च 2014 को एक्टिविस्ट ज़ाहिद बलोच को स्वतंत्र बलोचिस्तान के आह्वान करने के बाद पाकिस्तानी सेना ने उन्हें गिरफ्तार किया और और वहाँ के लोगो को धमकाया कि अगर आगे किसी ने आवाज उठाई तो उसका हाल भी जाहिद ब्लोच जैसा होगा. लेकिन तब से जाहिद बलोच का आज तक कुछ पता नहीं चल पाया है.
  • इसी तरह दिसम्बर 2013 में समीर बलोच को भी गायब कर दिया गया. मई 2009 में आगा आबिद शाह बलोच भी इसी चलन का शिकार हुए. मात्र दो साल बाद आघा आबिद शाह बलोच एक खाई में मृत पाए गए और शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत अवस्था में मिला. बलूच एक्टिविस्ट क़म्बर चाकर प्रताड़ित कर मारे गए. दीन मुहम्मद बलोच लापता और ऐसे कई नाम इस फेरहिस्त में शामिल हैं जिन्हें पाकिस्तानी सेना द्वारा गायब कर दिया गया है या फिर मार डाला गया है.
  • बलूचिस्तान में कोर्ट भी कुछ नहीं कर पाता क्योंकि जो भी वकील और एक्टिविस्ट्स लापता लोगों के केस लड़ते हैं उनको मरवा दिया जाता है. अभी हाल ही में अगस्त वकीलों के एक समूह को एक साथ मार दिया गया.
  • पिछले कई सालों से बलूचिस्तान में बड़ी तादाद में हुए लोगों और इसकी चलते बड़ी संख्या में अज्ञात कब्रों का निकल कर आने का मुद्दे पर बलूचिस्तान में की जा रही बर्बरता पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की खूब निंदा हुई है.

बलूचिस्तान के निवासियों का दर्द एक्टिविस्ट ताज बलोच की इस कविता में साफतौर पर झलक आता है -

"एक जिन्दा दफ़न बलूच का दर्द"

मैंने सुना है तुम साठ कब्रें भी पार कर चुके हो

और मैं अभी तक तीसरे कब्र तक नहीं पहुँच पाया हूँ.

पहली कब्र जब मैंने पार की तो एक आवाज आयी.

किसी ने पूछा, “कहाँ जा रहे हो?” और मैं सोचने लगा

कि मैं कहाँ जा रहा हूँ?

फिर से उसने पूछा, “तुम्हें पता है, मैं कौन हूँ?”

और सोचने लगा, “अब इसको क्या कहना कि ये है कौन?”

उसने कहा जब तुम निकल ही पड़े हो तो रस्ते में शायद अँधेरा हो

और तुम्हें रौशनी की जरुरत हो तो मेरा खून हो जला दीजिये.

इसके बाद मैं इतना गूंगा रहा कि फिर खुद से भी ना बोल पाया

और मैं पहली कब्र के बाद और दूसरी कब्र से पहले खुद में दफ़न हो गया.

देखें वीडियो -

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